{"product_id":"9781807151256","title":"जब मैं गिरा, तब मैं उठा","description":"“जब मैं गिरा, तब मैं उठा” जीवन के संघर्ष, आत्म-खोज और पुनर्जन्म की 21 कविताओं का संग्रह है। यह पुस्तक हर उस व्यक्ति की आवाज़ है जिसने गिरकर भी हार नहीं मानी। महेश पंवार ने सरल शब्दों में गहरी भावनाएँ बुनते हुए दिखाया है कि दर्द, डर और अकेलापन भी जीवन के शिक्षक हैं। हर कविता यह संदेश देती है कि गिरना अंत नहीं, बल्कि उठने की तैयारी है। यह किताब पाठक को अपने भीतर झाँकने, ठहरने और फिर से मुस्कुराने की प्रेरणा देती है।","brand":"महेश पंवार","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":43026474500167,"sku":"9781807151256","price":16.0,"currency_code":"USD","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0693\/9879\/0215\/files\/9781807151256_front.jpg?v=1785491000","url":"https:\/\/books.bookleafpub.com\/products\/9781807151256","provider":"BookLeaf Bookstore International","version":"1.0","type":"link"}