{"product_id":"9781807154455","title":"सबै संसारी सहोदरा","description":"काल बाह्य हो चुकी नीतियों पर अंधश्रद्धा ने आत्मघाती प्रथाओं को पुरजोर बढ़ावा दिया जिससे कालांतर में रक्त संबंधियों के बीच भी नाना प्रकार की भेदकारी समझ को विकसित होने का अवसर मिले और भिन्न सभ्यताओं के आक्रमण का प्रतिकार करने में असफल  रहे। देश टूटता और टुकड़ों में  बंटता चला गया।आस्थाओं के घालमेल ने अंग्रेजों के भारत को भी तीन टुकड़े कर दिया। बीस लाख निर्दोष बेमौत मरे। घिनौनी दीवारों में  जकड़ी मानवता के उद्धार के लिए,,,,तथ्यपरक संदेश है__\nसभी संसारवासी सहोदर हैं ।","brand":"Jata Shankar Aatrey","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":43026465587271,"sku":"9781807154455","price":16.0,"currency_code":"USD","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0693\/9879\/0215\/files\/9781807154455_front.jpg?v=1785490813","url":"https:\/\/books.bookleafpub.com\/products\/9781807154455","provider":"BookLeaf Bookstore International","version":"1.0","type":"link"}