{"product_id":"9789369530809","title":"Kisse gharelu ishq ke","description":"इन किस्सों को अपनी डायरी में सहेजने की बेनाम कोशिशें की थी मैंने। तब कभी सोचा भी नहीं था की किसी रोज़ इन किस्सों को यूं जग जाहिर कर पाऊंगी। ये क़िस्से मेरे जीवन के वो खुबसूरत पल है जिन्हें आधा मैंने जीया है, और आधे में प्रेम की चाशनी तो कभी मसाले मिलाकर आपको परोस रहीं हूं।\nये कहानियां शुरू हुई मेरे इश्क़ में पड़ने से। खास बात ये रही की इस इश्क़ में पड़े दिल ने बड़े टाके सहे है, कितनी बार टूटा है, कितनी बार संभला है। लेकिन अब जो ये पड़ा है प्यार में, तो बड़ा सुलझा सहमा लेकिन ताकतवर सा प्रतीत होता है। शायद आपका सवाल ये हो, की किताब का नाम घरेलू क्यों? घरेलू का मायने अक्सर हम साधारण समझते है। सीधा, सुलझा, सरल सा, बस ऐसा ही है ये इश्क।","brand":"Sheetal Mukesh","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":43025874223175,"sku":"9789369530809","price":16.0,"currency_code":"USD","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0693\/9879\/0215\/files\/9789369530809_front.jpg?v=1785483409","url":"https:\/\/books.bookleafpub.com\/products\/9789369530809","provider":"BookLeaf Bookstore International","version":"1.0","type":"link"}