{"product_id":"9789369531523-1","title":"ख़ामोशी बोल उठी","description":"\"ख़ामोशी बोल उठी\" एक ऐसी शायरी-संग्रह है जो उन लम्हों को आवाज़ देती है,\nजो अक्सर दिल में दफन रह जाते हैं।\nयह किताब मोहब्बत, जुदाई, अधूरे रिश्तों, और खामोश दर्द की नज़्मों का सिलसिला है —\nजो हर उस दिल को छू सकती है जो कभी टूटा है,\nकभी प्यार में भीगा है,\nया जिसने किसी बिना अल्फ़ाज़ के अलविदा को सहा है।\n\nहर पन्ना एक भाव है,\nहर नज़्म एक अधूरी दुआ,\nहर शेर एक ख़ामोशी की चीख़।\nयह किताब उन जज़्बातों का आईना है जिन्हें हम महसूस तो करते हैं,\nमगर कह नहीं पाते।\n\nअगर आपने कभी किसी को बेइंतिहा चाहा हो,\nया बेआवाज़ बिछड़न महसूस की हो —\nतो यह किताब आप ही के लिए है।\n\n","brand":"Prantik Panigrahi","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":43026709446727,"sku":"9789369531523","price":1.58,"currency_code":"USD","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0693\/9879\/0215\/files\/9789369531523_front_f7047e3c-6e47-44a1-907e-cb88095ba720.jpg?v=1785496675","url":"https:\/\/books.bookleafpub.com\/products\/9789369531523-1","provider":"BookLeaf Bookstore International","version":"1.0","type":"link"}