{"product_id":"9789369538201","title":"मृगतृष्णा","description":"यह कविता संग्रह उन अनछुए एहसासों, अधूरी चाहतों और पल-पल बदलते भावों का दस्तावेज़ है, जो कभी हमारी आँखों के सामने होते हैं, तो कभी एक स्वप्न की तरह ओझल हो जाते हैं।\n\n\"मृगतृष्णा – रेत से बहते शब्द\" में प्रेम, विरह, आशा, भ्रम, और आत्म-खोज के जटिल पहलुओं को शब्दों की लहरों में ढालने का प्रयास किया गया है। ये कविताएँ कभी रेत पर बिखरी यादों की तरह लगेंगी, तो कभी जलती धूप में किसी छांव की तरह। हर पंक्ति में एक अनकही गूंज है, जो पाठक के हृदय में गहराई तक उतरने की शक्ति रखती है।\n\nयह संग्रह उन लोगों के लिए है जो शब्दों में अपनी दुनिया तलाशते हैं, जो खामोशी में छुपे भावों को सुन सकते हैं, और जो जीवन की क्षणभंगुरता में भी एक अनंत सत्य की झलक देखना चाहते हैं।\n\n\"कभी-कभी हम जिन ख्वाबों के पीछे भागते हैं, व","brand":"शास्त्री गोकला राम","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":43025876058183,"sku":"9789369538201","price":16.0,"currency_code":"USD","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0693\/9879\/0215\/files\/9789369538201_front.jpg?v=1785483426","url":"https:\/\/books.bookleafpub.com\/products\/9789369538201","provider":"BookLeaf Bookstore International","version":"1.0","type":"link"}