{"product_id":"9789370920132","title":"अणु से अनूठी","description":"नाकाम इश्क़ के नज्म से परे जिंदगी।*\n\nकोई इंसान इश्क में \nकितना और कितनी बार \nऔर कैसे कैसे हार सकता है?\nउस परिकल्पना की \nप्रकास्ठा है एक कहानी।\n\nजिनका मुझसे सरोकार\n दशकों का है,\nवह मुझे हंसता खेलता देख \nबेहद खुश होते हैं।\nजिनका मेरे दुःख के समय\nसे पहचान है,\nवह मुस्कुराते चेहरे पर लाइक बटन दबा कर \nडी एम करते हैं कि 'सब ठीक?' \n\nचकना चूर शीशा भी \nकभी जुड़ कर\nसमाज का आइना बन सकता है,\nकिसने सोचा था?\n\nअनगिनत टुकड़ों में कभी बिखरे चस्मे से भी\n फिर से रंगीन दुनिया देखी जा सकती है।\nयह देखने वाले, जब चकित से ज्यादा खुश हों\nतो समझ जाइए के आप पर \nऊपर वाले की नेमत है,\nके इस स्वार्थ पूर्ण दुनिया में कोई आपको\nबिना वजह खुश देखना चाहता है।\n\nकुछ कमी नही लगती \nकोई खालीपन नही होता,\nजब किसी मकसद से जीवन जिया जाए।","brand":"डाॅ. अनूठी प्रिया","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":43026017484871,"sku":"9789370920132","price":16.0,"currency_code":"USD","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0693\/9879\/0215\/files\/9789370920132_front.jpg?v=1785487729","url":"https:\/\/books.bookleafpub.com\/products\/9789370920132","provider":"BookLeaf Bookstore International","version":"1.0","type":"link"}