{"product_id":"9789372136975","title":"चाँद हुआ पागल","description":"इस पुस्तक में कुछ गीत और कुछ ग़ज़लें शामिल की गई हैं , जो समाज के पारिवारिक, सामाजिक और राजनैतिक जीवन से ली गई हैं।  पुस्तक की रचनाओं में व्याकरण के फॉर्मूलों का प्रयोग नहीं किया गया है-अर्थात इन्हें \"व्याकरण से परे\" रखकर लिखा गया है -\n \n\"हर बहर को बहुत ही मनाना  पड़ा \nकाफ़ियों से भी हमको निभाना पड़ा \nकुछ रदीफ़ो से मिन्नत बहुत की मगर \nव्याकरण से परे,हमको जाना पड़ा\"  ","brand":"राजेन्द्र निगम राज","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":43026241716295,"sku":"9789372136975","price":16.0,"currency_code":"USD","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0693\/9879\/0215\/files\/9789372136975_front.jpg?v=1785489221","url":"https:\/\/books.bookleafpub.com\/products\/9789372136975","provider":"BookLeaf Bookstore International","version":"1.0","type":"link"}