{"product_id":"9789372139877","title":"मन की गठरी","description":"यह संग्रह उन भावनाओं की आवाज़ है, जो अक्सर पुरुषों के भीतर कहीं गहराई में दबी रह जाती हैं — गाँव की मिट्टी की सौंधी खुशबू, माँ की ममता, एकतरफ़ा प्रेम की कसक, और शहर की चकाचौंध में खोते सुकून की टीस। \"पुराना पता\", \"पुरुषों के पास कोई मायका नहीं होता\", \"भले ही एक तरफ़ा सही\", और \"चाहत है\" जैसी कविताएँ न केवल लेखक की आत्मा की पुकार हैं, बल्कि हर उस दिल की कहानी हैं जो अपनों से दूर होकर भी उन्हें हर साँस में जीता है। यह किताब एक सफ़र है — बचपन से जवानी तक, गाँव से शहर तक, रिश्तों से ख्वाहिशों तक, और अंततः उस सच्चाई तक जहाँ शब्द ही सहारा बनते हैं। यह सिर्फ़ कविताएँ नहीं हैं — यह जीवन की परतें हैं, जिन्हें पढ़ते हुए शायद आप भी अपने भीतर कहीं लौट जाएँ।","brand":"दिवाकर","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":43026238406727,"sku":"9789372139877","price":16.0,"currency_code":"USD","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0693\/9879\/0215\/files\/9789372139877_front.jpg?v=1785489151","url":"https:\/\/books.bookleafpub.com\/products\/9789372139877","provider":"BookLeaf Bookstore International","version":"1.0","type":"link"}