{"product_id":"9789375277798","title":"मैंने कर्मपथ क्यूँ चुना?","description":"मैंने कर्मपथ पे चलते हुए ठान रखा था क़ि हर सुबह ज़ब में आँखे खोलू, दृष्टि में चमकता स्वप्न तैरना चाहिए.\nजीने के लिये मेरे प्राण में कुछ आश होनी चाहिए.जो भी चाहिए दमदार होना चाहिए.वो स्वप्न भी शानदार होना चाहिए,जिसके साथ जुड़कर मेरे जूनून में भी सरहदे तोड़ने क़ि ललक उठनी चाहिए.उन स्वप्न से जुड़कर सारी इन्द्रियों में रोमांच पसरना चाहिए.\nसीधे सरल स्वप्न क़ो तो कोई भी पा लेगा.मेरे कर्मपथ क़ो अग्निपथ में बदल दे ऐसा वो स्वप्न आग का शोला होना चाहिए.में तैयार हूँ, कर्मपथ तैयार है,दुनिया क़ि ऐसी तैसी,मेरे सूरज से उड़ती चिंगारीयों क़ि चमक से,मेरे संसार सार में उनकी खोई हुई धधक पुनः लौट आनी चाहिए.\nआभार.🌹","brand":"Manisha Keshav","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":43026619007047,"sku":"9789375277798","price":16.0,"currency_code":"USD","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0693\/9879\/0215\/files\/9789375277798_front.jpg?v=1785492701","url":"https:\/\/books.bookleafpub.com\/products\/9789375277798","provider":"BookLeaf Bookstore International","version":"1.0","type":"link"}