{"product_id":"9789376426423","title":"बस यूँ ही","description":"जब शब्द अथाह हुए,\nमुस्कान ने सुनाई\nवो अनकही मन की किताब,\nऔर वही कविता बन गई —\nज़िंदगी|\n---\nरिश्तों की उलझन,\nस्त्री मन की अनकही पीड़ा,\nजीवन के अनुभवों की गहराई\nऔर संवेदनाओं की सुगंध से सजा\nयह काव्य-संग्रह\nहर पाठक को\nअपने ही जीवन के किसी न किसी पल से\nअवश्य जोड़ देगा।\n---\nबस यूँ ही\n\nन कोई शोर,\nन कोई दिखावा...\n\nबस जीवन के रंग,\nपलों की धूप-छाँव,\nरिश्तों की गर्माहट,\nयादों की नर्मी\nऔर मन की अनकही अनुभूतियाँ।\n\nइन कविताओं में\nजीवन के अनेक रंग हैं—\nकहीं मुस्कान, कहीं पीड़ा,\nकहीं प्रतीक्षा, कहीं अपनापन।\n---\nआइए...\nकुछ पल ठहरिए,\nबस यूँ ही पन्ने पलटिए,\nऔर जो शब्द\nआपके मन को छू जाएँ,\nउन्हें अपना बना लीजिए।","brand":"ऊषा केड़िया","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":43026679529543,"sku":"9789376426423","price":16.0,"currency_code":"USD","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0693\/9879\/0215\/files\/9789376426423_front.jpg?v=1785494031","url":"https:\/\/books.bookleafpub.com\/products\/9789376426423","provider":"BookLeaf Bookstore International","version":"1.0","type":"link"}