{"product_id":"9798898655273","title":"में किसे त्याग कर दूँ ?","description":"ज़ब तुम अपनी आभा की बौद्धिक, दैहिक, आत्मिक, आध्यात्मिक और मनोवैज्ञानिक परतो की गूढ संरचना मध्य संतुलन स्थापित नहीं करते हो, तनिक भेदभाव करते हो,बहुत बड़ा भुगतान करते हो.\nपरिणामस्वरूप जहाँ बुद्धि हावी होती है वहाँ संवेदना पस्त हो जाती है. ज़हाँ संवेदना ऊपर उठती है, अन्य परते बेहाल हो जाती है.\nसंवेदना ह्रदय से लगाकर जीने पर आहलाद तो देती है किंतु उसे संभालने में हुई चूक नुकशानदाई हो सकती है. अस्तित्व क़ो अणुओ में बांटकर बिखेर सकती है.\n\"में किसे त्याग कर दूँ\" काव्यसंग्रह में मनीषा केशव जीवन आधार की महत्वपूर्ण परतो में संतुलन-असंतुलन की प्रक्रिया से गुजरते हुए ,बेबाक पंक्तियों क़ो अपने प्रवाही अंदाज में प्रस्तुत करते हुए सर्व वाचक गण प्रति आभार जता रही है.\n\nआभार.\n","brand":"Manisha Keshav","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":43026300338247,"sku":"9798898655273","price":16.0,"currency_code":"USD","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0693\/9879\/0215\/files\/9798898655273_front.jpg?v=1785490151","url":"https:\/\/books.bookleafpub.com\/products\/9798898655273","provider":"BookLeaf Bookstore International","version":"1.0","type":"link"}