{"product_id":"9798900815084","title":"भारतीय नारी","description":"इस छोटे से कविताओ के संग्रह से एक राह दिखाने का प्रयास किया गया हैं ताकि स्त्री स्वयं उचित आचरण से रहे। स्त्री स्वरूप ही ये पूरी सृष्टि हैं और अब ऐसा हाल हैं कि खुद समाज में सुरक्षित नहीं, सम्मनित नहीं हैं। स्त्री ही तो समाज का निर्माण करती हैं, तो सबसे पहले जरूरी हैं की स्त्री स्वयं उचित आचरण को जाने और चले, फिर समाज अपने आप सही हो जाएगा। जहाँ भी देखा जाता है पुरुषो की तरह जिने में होड़ लगी हैं, परंतु स्त्रियों का अपना गुण और जीने का तारिका या भावना होता है, यहीं तो करण हैं की स्त्रियों को पूजा जाता था वो हमेशा ही पूजनीय हैं,  स्त्री को स्त्री के रूप में रहना चाहिए तभी समाज आगे बढ़ेगा, ये केवल स्त्री शरीर से होने से नहीं होगा, आप पूर्ण स्त्री होंगी, तब आप शक्ति होंगी, यही बताया गया है इसमे।","brand":"अमृता पाण्डेय","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":43026398150727,"sku":"9798900815084","price":16.0,"currency_code":"USD","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0693\/9879\/0215\/files\/9798900815084_front.jpg?v=1785490538","url":"https:\/\/books.bookleafpub.com\/products\/9798900815084","provider":"BookLeaf Bookstore International","version":"1.0","type":"link"}