{"product_id":"9798900817095","title":"मनलहरी","description":"\"मनलहरी\"  \nमेरे मन में प्रतिदिन आते विचार,भाव जो कि जीवन के हर मोड़ पर आते है उसका विषय बनाकर उन्हें मैंने काव्य का रूप देने का प्रयास किया है। यह पुस्तक केवल काव्य का संग्रह नहीं, बल्कि मन से मेरे संवादों की प्रस्तुति है जो में महसूस करता हूं | हर काव्य की अंत दो लाइन में पूज्य गुरुवर प्रशस्त सागर जी मुनिराज से जो शिक्षाएं मिली उन्हीं से प्रेरित होकर लिखी गई हैं उनके द्वारा प्राप्त मार्गदर्शन मेरे लिए अनमोल निधि समान है |\n\nवैभव जैन","brand":"वैभव जैन","offers":[{"title":"Default Title","offer_id":43026419056711,"sku":"9798900817095","price":16.0,"currency_code":"USD","in_stock":true}],"thumbnail_url":"\/\/cdn.shopify.com\/s\/files\/1\/0693\/9879\/0215\/files\/9798900817095_front.jpg?v=1785490614","url":"https:\/\/books.bookleafpub.com\/products\/9798900817095","provider":"BookLeaf Bookstore International","version":"1.0","type":"link"}