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भावों का विस्तार, मन ही है आधार ।

भावों का विस्तार, मन ही है आधार ।

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ये कविता संग्रह भावनाओं का वो गुलिस्ता है जो बालपन की चंचलता और सपने, माता पिता के जीवन का दर्शन, युवावस्था से जुड़े संघर्ष , विवाह और रिश्तों से जुड़ी उलझनों के साथ-साथ प्रकृति से मिली प्रेरणा जैसे भावों को एकसाथ प्रस्तुत करती है । वो सभी लोग जो इनमें से किसी भी भावनाओं से ख़ुद को जुड़ा हुआ महसूस करते हैं, २१ कविताओं की ये शृंखला उन्हें ज़रूर पसंद आएगी ।

SKU:9781807156282

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