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मैंने कर्मपथ क्यूँ चुना?

मैंने कर्मपथ क्यूँ चुना?

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मैंने कर्मपथ पे चलते हुए ठान रखा था क़ि हर सुबह ज़ब में आँखे खोलू, दृष्टि में चमकता स्वप्न तैरना चाहिए. जीने के लिये मेरे प्राण में कुछ आश होनी चाहिए.जो भी चाहिए दमदार होना चाहिए.वो स्वप्न भी शानदार होना चाहिए,जिसके साथ जुड़कर मेरे जूनून में भी सरहदे तोड़ने क़ि ललक उठनी चाहिए.उन स्वप्न से जुड़कर सारी इन्द्रियों में रोमांच पसरना चाहिए. सीधे सरल स्वप्न क़ो तो कोई भी पा लेगा.मेरे कर्मपथ क़ो अग्निपथ में बदल दे ऐसा वो स्वप्न आग का शोला होना चाहिए.में तैयार हूँ, कर्मपथ तैयार है,दुनिया क़ि ऐसी तैसी,मेरे सूरज से उड़ती चिंगारीयों क़ि चमक से,मेरे संसार सार में उनकी खोई हुई धधक पुनः लौट आनी चाहिए. आभार.🌹

SKU:9789375277798

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